पुन्य पुंज तुम्ह पवनकुमारा

चौपाई ५, दोहा १९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

पुन्य पुंज तुम्ह पवनकुमारा। सेवहु जाइ कृपा आगारा॥ अस कहि कपि सब चले तुरंता। अंगद कहइ सुनहु हनुमंता॥ ५ ॥

अर्थ

हे पवनकुमार! तुम पुण्य की राशि हो। जाकर कृपाधाम श्रीरामजी की सेवा करो। सब वानर ऐसा कहकर तुरंत चल पड़े। अंगद ने कहा—हे हनुमान्! सुनो—

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “वानरों की और निषाद की विदाई” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा वानरों और निषाद की प्रेमपूर्ण विदाई एवं आलिंगन का वर्णन है।

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वानरों की और निषाद की विदाई