प्रभु सर्बग्य कीन्ह अति आदर कृपानिधान
प्रभु सर्बग्य कीन्ह अति आदर कृपानिधान
दोहा १२ (ग) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
प्रभु सर्बग्य कीन्ह अति आदर कृपानिधान। लखेउ न काहूँ मरम कछु लगे करन गुन गान॥ १२ (ग) ॥
अर्थ
कृपानिधान सर्वज्ञ प्रभु ने [उन्हें पहचानकर] उनका बहुत ही आदर किया। इसका भेद किसी ने कुछ भी नहीं जाना। वेद गुणगान करने लगे।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का दोहा १२ (ग) है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।
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राम राज्याभिषेक और स्तुति