प्रभु रुख देखि बिनय बहु भाषी
प्रभु रुख देखि बिनय बहु भाषी
चौपाई ३, दोहा १९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रभु रुख देखि बिनय बहु भाषी। चलेउ हृदयँ पद पंकज राखी॥ अति आदर सब कपि पहुँचाए। भाइन्ह सहित भरत पुनि आए॥ ३ ॥
अर्थ
किन्तु प्रभु का रुख देखकर, बहुत-से विनयवचन कहकर तथा हृदय में चरणकमलों को रखकर वे चले। अत्यन्त आदर के साथ सब वानरों को पहुँचाकर भाइयों सहित भरतजी लौट आये।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “वानरों की और निषाद की विदाई” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा वानरों और निषाद की प्रेमपूर्ण विदाई एवं आलिंगन का वर्णन है।
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वानरों की और निषाद की विदाई