प्रभु नारद संबाद कहि मारुति मिलन

दोहा ६६ (क) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

प्रभु नारद संबाद कहि मारुति मिलन प्रसंग। पुनि सुग्रीव मिताई बालि प्रान कर भंग॥ ६६ (क) ॥

अर्थ

प्रभु और नारदजी का संवाद और मारुतिके मिलने का प्रसंग कहकर फिर सुग्रीव से मित्रता और बाली के प्राणनाश का वर्णन किया।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का दोहा ६६ (क) है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा