फूलहिं फरहिं सदा तरु कानन

चौपाई १, दोहा २३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

फूलहिं फरहिं सदा तरु कानन। रहहिं एक सँग गज पंचानन॥ खग मृग सहज बयरु बिसराई। सबन्हि परस्पर प्रीति बढ़ाई॥ १ ॥

अर्थ

वनों में वृक्ष सदा फूलते और फलते हैं। हाथी और सिंह [वैर भूलकर] एक साथ रहते हैं। पक्षी और पशु सभी ने स्वाभाविक वैर भुलाकर आपस में प्रेम बढ़ा लिया है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “रामराज्य का वर्णन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्य में धर्म, सुख, समृद्धि और प्रजा के कल्याण का वर्णन है।

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रामराज्य का वर्णन