नयन दोष जा कहँ जब होई

चौपाई २, दोहा ७३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

नयन दोष जा कहँ जब होई। पीत बरन ससि कहुँ कह सोई॥ जब जेहि दिसि भ्रम होइ खगेसा। सो कह पच्छिम उयउ दिनेसा॥ २ ॥

अर्थ

जब जिसे नेत्रदोष होता है, तब वह चन्द्रमा को पीले रंग का कहता है। हे पक्षिराज! जब जिसे दिशाभ्रम होता है, तब वह कहता है कि सूर्य पश्चिम में उदय हुआ है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा