मूढ़ परम सिख देउँ न मानसि

चौपाई ७, दोहा ११२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

मूढ़ परम सिख देउँ न मानसि। उत्तर प्रतिउत्तर बहु आनसि॥ सत्य बचन बिस्वास न करही। बायस इव सबही ते डरही॥ ७ ॥

अर्थ

ओरे मूढ़! मैं तुझे सर्वोत्तम शिक्षा देता हूँ, तो भी तू उसे नहीं मानता और बहुत-से उत्तर-प्रत्युत्तर लाकर रखता है। मेरे सत्य वचन पर विश्वास नहीं करता! कौए की भाँति सभी से डरता है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा ११२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।

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लोमशजी से शाप और अनुग्रह