मन बच क्रम मोहि निज जन

चौपाई २, दोहा ११३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

मन बच क्रम मोहि निज जन जाना। मुनि मति पुनि फेरी भगवाना॥ रिषि मम महत सीलता देखी। राम चरन बिस्वास बिसेषी॥ २ ॥

अर्थ

मन, वचन और कर्म से जब प्रभु ने मुझे अपना जन जान लिया, तब भगवान् ने मुनि की बुद्धि फिर पलट दी। ऋषि ने मेरी महत् शीलता देखी, राम चरणों में विशेष विश्वास देखा।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।

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लोमशजी से शाप और अनुग्रह