लोभइ ओढ़न लोभइ डासन
लोभइ ओढ़न लोभइ डासन
चौपाई १, दोहा ४० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
लोभइ ओढ़न लोभइ डासन। सिस्नोदर पर जमपुर त्रास न॥ काहू की जौं सुनहिं बड़ाई। स्वास लेहिं जनु जूड़ी आई॥ १ ॥
अर्थ
लोभ ही उनका ओढ़ना और लोभ ही बिछौना होता है (अर्थात् लोभ ही से वे सदा घिरे हुए रहते हैं)। वे पशुओं के समान आहार और मैथुन के ही परायण होते हैं, उन्हें यमपुर का भय नहीं लगता। यदि किसी की बड़ाई सुन पाते हैं, तो वे ऐसी [दुःखभरी] साँस लेते हैं मानो उन्हें जूड़ी आ गयी हो।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत का प्रश्न, राम का उपदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा भरतजी के प्रश्न और राम के धर्म, भक्ति तथा संत-असंत-विवेक के उपदेश का वर्णन है।
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भरत का प्रश्न, राम का उपदेश