जब काहू कै देखहिं बिपती
जब काहू कै देखहिं बिपती
चौपाई २, दोहा ४० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जब काहू कै देखहिं बिपती। सुखी भए मानहुँ जग नृपती॥ स्वारथ रत परिवार बिरोधी। लंपट काम लोभ अति क्रोधी॥ २ ॥
अर्थ
और जब किसी की विपत्ति देखते हैं, तब ऐसे सुखी होते हैं मानो जगत् भर के राजा हो गये हों। वे स्वार्थपरायण, परिवारवालों के विरोधी, काम और लोभ के कारण लम्पट और अत्यन्त क्रोधी होते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत का प्रश्न, राम का उपदेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा भरतजी के प्रश्न और राम के धर्म, भक्ति तथा संत-असंत-विवेक के उपदेश का वर्णन है।
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भरत का प्रश्न, राम का उपदेश