कुन्द इन्दु दर गौर सुन्दरं
कुन्द इन्दु दर गौर सुन्दरं
श्लोक ३ · उत्तरकाण्ड
श्लोक पाठ
कुन्दइन्दुदरगौरसुन्दरं अम्बिकापतिमभीष्टसिद्धिदम्। कारुणीककलकञ्जलोचनं नौमि शङ्करमनङ्गमोचनम्॥ ३ ॥
अर्थ
कुन्द के फूल, चन्द्रमा और श्वेत रंग के समान सुन्दर गौरवर्ण, जगज्जननी श्रीपार्वतीजी के पति, वांछित फल के देनेवाले, [दुःखियों पर सदा] दया करनेवाले, सुन्दर कमल के समान नेत्रवाले, कामदेव से छुड़ानेवाले, [कल्याणकारी] श्रीशङ्करजी को मैं नमस्कार करता हूँ।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का श्लोक ३ है। इस प्रकरण में उत्तरकाण्ड के आरंभ में प्रभु राम, गुरु और संतों की पवित्र वंदना तथा राम के आगमन के शुभ शकुनों का वर्णन है।
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मंगलाचरण