कृपासिंधु जब मंदिर गए

चौपाई २, दोहा १० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

कृपासिंधु जब मंदिर गए। पुर नर नारि सुखी सब भए॥ गुर बसिष्ट द्विज लिए बुलाई। आजु सुघरी सुदिन समुदाई॥ २ ॥

अर्थ

कृपासिंधु श्रीरामजी जब अपने महल को गये, तब नगर के स्त्री-पुरुष सब सुखी हुए। गुरु वसिष्ठ जी ने ब्राह्मणों को बुला लिया [और कहा--] आज शुभ घड़ी, सुन्दर दिन आदि सभी शुभ योग हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।

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राम का स्वागत, भरत मिलाप