कोटिन्ह चतुरानन गौरीसा
कोटिन्ह चतुरानन गौरीसा
चौपाई ३, दोहा ८० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
कोटिन्ह चतुरानन गौरीसा। अगनित उडगन रबि रजनीसा॥ अगनित लोकपाल जम काला। अगनित भूधर भूमि बिसाला॥ ३ ॥
अर्थ
करोड़ों ब्रह्मा और शिवजी, अनगिनत तारागण, सूर्य और चन्द्रमा, अनगिनत लोकपाल, यम और काल, अनगिनत विशाल पर्वत और भूमि।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा