कोटिन्ह बाजिमेध प्रभु कीन्हे
कोटिन्ह बाजिमेध प्रभु कीन्हे
चौपाई १, दोहा २४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
कोटिन्ह बाजिमेध प्रभु कीन्हे। दान अनेक द्विजन्ह कहँ दीन्हे॥ श्रुति पथ पालक धर्म धुरंधर। गुनातीत अरु भोग पुरंदर॥ १ ॥
अर्थ
प्रभु श्रीरामजी ने करोड़ों अश्वमेध यज्ञ किये और ब्राह्मणों को अनेक दान दिये। श्रीरामचन्द्रजी वेदमार्ग के पालनेवाले, धर्म की धुरी को धारण करनेवाले, [प्रकृतिजन्य सत्त्व, रज और तम] तीनों गुणों से अतीत और भोगों (ऐश्वर्य) में इन्द्र के समान हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामराज्य का वर्णन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्य में धर्म, सुख, समृद्धि और प्रजा के कल्याण का वर्णन है।
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रामराज्य का वर्णन