बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप
बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप
दोहा २३ · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप जेतनेहि काज। मागें बारिद देहिं जल रामचंद्र कें राज॥ २३ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी के राज्य में चन्द्रमा अपनी [अमृतमयी] किरणों से पृथ्वी को पूर्ण कर देते हैं। सूर्य उतना ही तपते हैं जितनी आवश्यकता होती है और मेघ माँगने से [जब जहाँ जितना चाहिये उतना ही] जल देते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामराज्य का वर्णन” प्रकरण का दोहा २३ है। इस प्रकरण में रामराज्य में धर्म, सुख, समृद्धि और प्रजा के कल्याण का वर्णन है।
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रामराज्य का वर्णन