करउँ सदा रघुपति गुन गाना
करउँ सदा रघुपति गुन गाना
चौपाई ६, दोहा ११४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
करउँ सदा रघुपति गुन गाना। सादर सुनहिं बिहंग सुजाना॥ जब जब अवधपुरीं रघुबीरा। धरहिं भगत हित मनुज सरीरा॥ ६ ॥
अर्थ
मैं यहाँ सदा श्रीरघुनाथजी के गुणों का गान किया करता हूँ और चतुर पक्षी उसे आदरपूर्वक सुनते हैं। अयोध्यापुरी में जब-जब श्रीरघुवीर भक्तों के हित के लिये मनुष्य शरीर धारण करते हैं,
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ११४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।
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लोमशजी से शाप और अनुग्रह