कालरूप तिन्ह कहँ मैं भ्राता

चौपाई ३, दोहा ४१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

कालरूप तिन्ह कहँ मैं भ्राता। सुभ अरु असुभ कर्म फल दाता॥ अस बिचारि जे परम सयाने। भजहिं मोहि संसृत दुख जाने॥ ३ ॥

अर्थ

हे भाई! मैं उनके लिये कालरूप (भयंकर) हूँ और उनके अच्छे और बुरे कर्मों का [यथायोग्य] फल देनेवाला हूँ! ऐसा विचारकर जो लोग परम चतुर हैं वे संसार [के प्रवाह] को दुःखरूप जानकर मुझे ही भजते हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भरत का प्रश्न, राम का उपदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा भरतजी के प्रश्न और राम के धर्म, भक्ति तथा संत-असंत-विवेक के उपदेश का वर्णन है।

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भरत का प्रश्न, राम का उपदेश