कहइ भसुंड सुनहु खगनायक
कहइ भसुंड सुनहु खगनायक
चौपाई १, दोहा ७६ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
कहइ भसुंड सुनहु खगनायक। राम चरित सेवक सुखदायक॥ नृप मंदिर सुंदर सब भाँती। खचित कनक मनि नाना जाती॥ १ ॥
अर्थ
भुशुण्डिजी कहने लगे--हे पक्षिराज! सुनिये, श्रीरामजी का चरित्र सेवकों को सुख देनेवाला है। [अयोध्या का] राजमहल सब प्रकार से सुन्दर है। सोने के महल में नाना प्रकार के रत्न जड़े हुए हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा