जदपि कीन्ह एहिं दारुन पापा
जदपि कीन्ह एहिं दारुन पापा
चौपाई २, दोहा १०९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जदपि कीन्ह एहिं दारुन पापा। मैं पुनि दीन्हि कोप करि सापा॥ तदपि तुम्हारि साधुता देखी। करिहउँ एहि पर कृपा बिसेषी॥ २ ॥
अर्थ
यद्यपि इसने भयानक पाप किया है और मैंने भी इसे क्रोध कर शाप दिया है, तो भी तुम्हारी साधुता देखकर मैं इस पर विशेष कृपा करूँगा।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु की क्षमायाचना, शाप के अनुग्रह में परिणत होने और काकभुशुण्डि की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन है।
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गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह