जब न लेउँ मैं तब बिधि
जब न लेउँ मैं तब बिधि
चौपाई ४, दोहा ४८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
जब न लेउँ मैं तब बिधि मोही। कहा लाभ आगें सुत तोही॥ परमातमा ब्रह्म नर रूपा। होइहि रघुकुल भूषन भूपा॥ ४ ॥
अर्थ
जब मैं उसे नहीं लेता था, तब ब्रह्माजी ने मुझे कहा था—हे पुत्र! इससे तुमको आगे चलकर बहुत लाभ होगा। स्वयं ब्रह्म परमात्मा मनुष्यरूप धारण कर रघुकुल के भूषण राजा होंगे।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ और श्रीराम के मध्य गूढ़ आध्यात्मिक संवाद तथा भाइयों सहित अमराई भ्रमण का वर्णन है।
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राम-वसिष्ठ संवाद, अमराई भ्रमण