इंद्री द्वार झरोखा नाना
इंद्री द्वार झरोखा नाना
चौपाई ६, दोहा ११८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
इंद्री द्वार झरोखा नाना। तहँ तहँ सुर बैठे करि थाना॥ आवत देखहिं बिषय बयारी। ते हठि देहिं कपाट उघारी॥ ६ ॥
अर्थ
इन्द्रियों के द्वार हृदयरूपी घर के अनेक झरोखे हैं। वहाँ-वहाँ (प्रत्येक झरोखे पर) देवता थाना किए बैठे हैं। ज्यों ही वे विषयरूपी हवा को आते देखते हैं, त्यों ही हठपूर्वक किवाड़ खोल देते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “ज्ञान और भक्ति की महिमा” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ११८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में ज्ञान, भक्ति और ज्ञानदीपक के प्रतीक द्वारा भक्ति की सहज महिमा का वर्णन है।
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ज्ञान और भक्ति की महिमा