हृदयँ बिचारति बारहिं बारा
हृदयँ बिचारति बारहिं बारा
चौपाई ४, दोहा ७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
हृदयँ बिचारति बारहिं बारा। कवन भाँति लंकापति मारा॥ अति सुकुमार जुगल मेरे बारे। निसिचर सुभट महाबल भारे॥ ४ ॥
अर्थ
वे बार-बार हृदय में विचारती हैं कि इन्होंने लंकापति रावण को कैसे मारा? मेरे ये दोनों बच्चे बहुत सुकुमार हैं और राक्षस तो बड़े भारी योद्धा और महाबली थे।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
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राम का स्वागत, भरत मिलाप