हरि माया कृत दोष गुन बिनु

दोहा १०४ (क) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

हरि माया कृत दोष गुन बिनु हरि भजन न जाहिं। भजिअ राम तजि काम सब अस बिचारि मन माहिं॥ १०४ (क) ॥

अर्थ

श्रीहरि की मायाके द्वारा रचे हुए दोष और गुण श्रीहरि के भजन बिना नहीं जाते। मन में ऐसा विचार कर, सब कामनाओं को छोड़कर (निष्कामभावसे) श्रीरामजी का भजन करना चाहिये।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा” प्रकरण का दोहा १०४ (क) है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म-वृत्तांत और कलियुग की महिमा एवं भक्ति की शरण का वर्णन है।

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काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा