हर गुर निंदक दादुर होई
हर गुर निंदक दादुर होई
चौपाई १२, दोहा १२१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
हर गुर निंदक दादुर होई। जन्म सहस्र पाव तन सोई॥ द्विज निंदक बहु नरक भोग करि। जग जनमइ बायस सरीर धरि॥ १२ ॥
अर्थ
शिव और गुरु की निन्दा करनेवाला मनुष्य (अगले जन्म में) मेढक होता है और वह हजार जन्म तक वही मेढक का शरीर पाता है। ब्राह्मणों की निन्दा करनेवाला व्यक्ति बहुत-से नरक भोगकर फिर जगत् में कौए का शरीर धारण करके जन्म लेता है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर” प्रकरण का चौपाई १२, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गरुड़ के सात प्रश्नों पर काकभुशुण्डि का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
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गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर