ग्यान पंथ कृपान कै धारा
ग्यान पंथ कृपान कै धारा
चौपाई १, दोहा ११९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
ग्यान पंथ कृपान कै धारा। परत खगेस होइ नहिं बारा॥ जो निर्बिघ्न पंथ निर्बहई। सो कैवल्य परम पद लहई॥ १ ॥
अर्थ
ज्ञान का मार्ग कृपाण (दुधारी तलवार) की धार के समान है। हे पक्षिराज! इस मार्ग से गिरते देर नहीं लगती। जो इस मार्ग को निर्विघ्न निबाह लेता है, वही कैवल्य (मोक्ष) रूप परम पद को प्राप्त करता है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “ज्ञान और भक्ति की महिमा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में ज्ञान, भक्ति और ज्ञानदीपक के प्रतीक द्वारा भक्ति की सहज महिमा का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
ज्ञान और भक्ति की महिमा