गुंजत मधुकर मुखर मनोहर

चौपाई २, दोहा २८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

गुंजत मधुकर मुखर मनोहर। मारुत त्रिबिधि सदा बह सुंदर॥ नाना खग बालकन्हि जिआए। बोलत मधुर उड़ात सुहाए॥ २ ॥

अर्थ

भौरे मनोहर स्वर से गुंजार करते हैं। सदा तीनों प्रकार की सुन्दर वायु बहती रहती है। बालकों ने बहुत-से पक्षी पाल रखे हैं, जो मधुर बोली बोलते हैं और उड़ने में सुन्दर लगते हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।

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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन