गरुड़ महाग्यानी गुन रासी

चौपाई २, दोहा ५५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

गरुड़ महाग्यानी गुन रासी। हरि सेवक अति निकट निवासी॥ तेहिं केहि हेतु काग सन जाई। सुनी कथा मुनि निकर बिहाई॥ २ ॥

अर्थ

गरुड़जी तो महान् ज्ञानी, सद्गुणों की राशि, श्री हरि के सेवक और उनके अत्यन्त निकट रहने वाले (उनके वाहन ही) हैं। उन्होंने मुनियों के समूह को छोड़कर, कौए से जाकर हरिकथा किस कारण सुनी?

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा