एहि महँ रुचिर सप्त सोपाना
एहि महँ रुचिर सप्त सोपाना
चौपाई २, दोहा १२९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
एहि महँ रुचिर सप्त सोपाना। रघुपति भगति केर पंथाना॥ अति हरि कृपा जाहि पर होई। पाउँ देइ एहिं मारग सोई॥ २ ॥
अर्थ
इसमें सात सुन्दर सीढ़ियाँ हैं, जो श्रीरघुनाथजी की भक्ति को प्राप्त करने के मार्ग हैं। जिस पर श्रीहरि की अत्यन्त कृपा होती है, वही इस मार्ग पर पैर रखता है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
रामायण माहात्म्य और फलस्तुति