धरम तड़ाग ग्यान बिग्याना

चौपाई ४, दोहा ३१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

धरम तड़ाग ग्यान बिग्याना। ए पंकज बिकसे बिधि नाना॥ सुख संतोष बिराग बिबेका। बिगत सोक ए कोक अनेका॥ ४ ॥

अर्थ

धर्मरूपी तालाब में ज्ञान, विज्ञान--ये अनेकों प्रकार के कमल खिल उठे। सुख, संतोष, वैराग्य और विवेक--ये अनेकों चकवे शोकरहित हो गये।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।

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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन