देखि राम मुनि आवत हरषि दंडवत
देखि राम मुनि आवत हरषि दंडवत
दोहा ३२ · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
देखि राम मुनि आवत हरषि दंडवत कीन्ह। स्वागत पूँछि पीत पट प्रभु बैठन कहँ दीन्ह॥ ३२ ॥
अर्थ
सनकादि मुनियों को आते देखकर श्रीरामचन्द्रजी ने हर्षित होकर दण्डवत् की और स्वागत पूछकर प्रभु ने [उनके] बैठने के लिये अपना पीताम्बर बिछा दिया।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का दोहा ३२ है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन