देखत हनूमान अति हरषेउ

चौपाई १, दोहा २ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

देखत हनूमान अति हरषेउ। पुलक गात लोचन जल बरषेउ॥ मन महँ बहुत भाँति सुख मानी। बोलेउ श्रवन सुधा सम बानी॥ १ ॥

अर्थ

उन्हें देखते ही हनुमानजी अत्यन्त हर्षित हुए। उनका शरीर पुलकित हो गया, नेत्रों से [प्रेमाश्रुओं का] जल बरसने लगा। मन में बहुत प्रकार से सुख मानकर वे कानों के लिए अमृत के समान वाणी बोले--।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भरत विरह, हनुमान आगमन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत के विरह, हनुमान के शुभ आगमन और अयोध्या में हर्ष का वर्णन है।

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भरत विरह, हनुमान आगमन