दैहिक दैविक भौतिक तापा

चौपाई १, दोहा २१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥ सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥ १ ॥

अर्थ

“राम-राज” में दैहिक, दैविक और भौतिक ताप किसी को नहीं व्यापते। सब मनुष्य परस्पर प्रेम करते हैं और वेदों में बतायी हुई नीति (मर्यादा) में तत्पर रहकर अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “रामराज्य का वर्णन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्य में धर्म, सुख, समृद्धि और प्रजा के कल्याण का वर्णन है।

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रामराज्य का वर्णन