चारिउ चरन धर्म जग माहीं
चारिउ चरन धर्म जग माहीं
चौपाई २, दोहा २१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
चारिउ चरन धर्म जग माहीं। पूरि रहा सपनेहुँ अघ नाहीं॥ राम भगति रत नर अरु नारी। सकल परम गति के अधिकारी॥ २ ॥
अर्थ
धर्म अपने चारों चरणों (सत्य, शौच, दया और दान) से जगत् में परिपूर्ण हो रहा है; स्वप्न में भी कहीं पाप नहीं है। पुरुष और स्त्री सभी राम-भक्ति के परायण हैं और सभी परम गति (मोक्ष) के अधिकारी हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामराज्य का वर्णन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्य में धर्म, सुख, समृद्धि और प्रजा के कल्याण का वर्णन है।
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रामराज्य का वर्णन