छूटी त्रिबिधि ईषना गाढ़ी

चौपाई ७, दोहा ११० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

छूटी त्रिबिधि ईषना गाढ़ी। एक लालसा उर अति बाढ़ी॥ राम चरन बारिज जब देखौं। तब निज जन्म सफल करि लेखौं॥ ७ ॥

अर्थ

मेरी तीनों प्रकार की (पुत्र की, धन की और मान की) गहरी प्रबल वासनाएँ छूट गयीं और हृदय में एक यही लालसा अत्यन्त बढ़ गयी कि जब श्रीरामजी के चरणकमलों के दर्शन करूँ तब अपना जन्म सफल हुआ समझूँ।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा ११० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु की क्षमायाचना, शाप के अनुग्रह में परिणत होने और काकभुशुण्डि की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह