ब्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं
ब्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं
चौपाई २, दोहा ५९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
ब्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं। कहेसि जो संसय निज मन माहीं॥ सुनि नारदहि लागि अति दाया। सुनु खग प्रबल राम कै माया॥ २ ॥
अर्थ
व्याकुल होकर वे देवर्षि नारदजी के पास गये और मन में जो सन्देह था, वह उनसे कहा। उसे सुनकर नारद को अत्यन्त दया आयी। [उन्होंने कहा--] हे गरुड़! सुनिये, श्रीरामजी की माया बड़ी ही बलवती है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा