बिनु गुर होइ कि ग्यान ग्यान
बिनु गुर होइ कि ग्यान ग्यान
सोरठा ८९ (क) · उत्तरकाण्ड
सोरठा पाठ
बिनु गुर होइ कि ग्यान ग्यान कि होइ बिराग बिनु। गावहिं बेद पुरान सुख कि लहिअ हरि भगति बिनु॥ ८९ (क) ॥
अर्थ
गुरु के बिना क्या ज्ञान होता है? ज्ञान के बिना क्या वैराग्य होता है? वेद और पुराण गाते हैं कि हरि-भक्ति के बिना क्या सुख मिल सकता है?
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का सोरठा ८९ (क) है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा