बिगत काम मम नाम परायन

चौपाई ३, दोहा ३८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

बिगत काम मम नाम परायन। सांति बिरति बिनती मुदितायन॥ सीतलता सरलता मयत्री। द्विज पद प्रीति धर्म जनयत्री॥ ३ ॥

अर्थ

उनको कोई कामना नहीं होती। वे मेरे नाम के परायण होते हैं। शान्ति, वैराग्य, विनय और प्रसन्नता के घर होते हैं। उनमें शीतलता, सरलता, सब के प्रति मित्रभाव और ब्राह्मण के चरणों में प्रीति होती है, जो धर्मों को उत्पन्न करनेवाली है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भरत का प्रश्न, राम का उपदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा भरतजी के प्रश्न और राम के धर्म, भक्ति तथा संत-असंत-विवेक के उपदेश का वर्णन है।

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भरत का प्रश्न, राम का उपदेश