भेटेउ तनय सुमित्राँ राम चरन रति

दोहा ६ (क) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

भेटेउ तनय सुमित्राँ राम चरन रति जानि। रामहि मिलत कैकई हृदयँ बहुत सकुचानि॥ ६ (क) ॥

अर्थ

सुमित्राजी ने अपने पुत्र लक्ष्मणजी की श्रीरामजी के चरणों में प्रीति जानकर [श्रीरामजी से] भेंट की। श्रीरामजी से मिलते समय कैकेयीजी हृदय में बहुत सकुचायीं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का दोहा ६ (क) है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।

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राम का स्वागत, भरत मिलाप