बर तर कह हरि कथा प्रसंगा
बर तर कह हरि कथा प्रसंगा
चौपाई ४, दोहा ५७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
बर तर कह हरि कथा प्रसंगा। आवहिं सुनहिं अनेक बिहंगा॥ राम चरित बिचित्र बिधि नाना। प्रेम सहित कर सादर गाना॥ ४ ॥
अर्थ
बरगद के नीचे वह श्रीहरि की कथाओं के प्रसंग कहता है। वहाँ अनेकों पक्षी आते और कथा सुनते हैं। वह विचित्र रामचरित्र को अनेकों प्रकार से प्रेमसहित आदरपूर्वक गान करता है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा