औरउ ग्यान भगति कर भेद सुनहु
औरउ ग्यान भगति कर भेद सुनहु
दोहा ११६ (ख) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
औरउ ग्यान भगति कर भेद सुनहु सुप्रबीन। जो सुनि होइ राम पद प्रीति सदा अबिछीन॥ ११६ (ख) ॥
अर्थ
हे सुचतुर गरुड़जी! ज्ञान और भक्ति का और भी भेद सुनिये, जिसके सुनने से श्रीरामजी के चरणों में सदा अविच्छिन्न (एकतार) प्रेम हो जाता है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “ज्ञान और भक्ति की महिमा” प्रकरण का दोहा ११६ (ख) है। इस प्रकरण में ज्ञान, भक्ति और ज्ञानदीपक के प्रतीक द्वारा भक्ति की सहज महिमा का वर्णन है।
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ज्ञान और भक्ति की महिमा