अस कहि चलेउ बालिसुत फिरि आयउ

दोहा १९ (ख) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

अस कहि चलेउ बालिसुत फिरि आयउ हनुमंत। तासु प्रीति प्रभु सन कही मगन भए भगवंत॥ १९ (ख) ॥

अर्थ

ऐसा कहकर बालिसुत अंगद चले, तब हनुमानजी लौट आये और आकर प्रभु से उनका प्रेम वर्णन किया। उसे सुनकर भगवान् प्रेममग्न हो गये।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “वानरों की और निषाद की विदाई” प्रकरण का दोहा १९ (ख) है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा वानरों और निषाद की प्रेमपूर्ण विदाई एवं आलिंगन का वर्णन है।

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वानरों की और निषाद की विदाई