आए भरत संग सब लोगा

चौपाई १, दोहा ५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

आए भरत संग सब लोगा। कृस तन श्रीरघुबीर बियोगा॥ बामदेव बसिष्ट मुनिनायक। देखे प्रभु महि धरि धनु सायक॥ १ ॥

अर्थ

भरतजी के साथ सब लोग आये। श्रीरघुबीर के वियोग से सबके शरीर कृश हो रहे हैं। प्रभु ने वामदेव, वसिष्ठ आदि मुनिश्रेष्ठों को देखा, तो उन्होंने धनुष-बाण पृथ्वी पर रखकर--.

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।

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राम का स्वागत, भरत मिलाप