यह सपना मैं कहउँ पुकारी
यह सपना मैं कहउँ पुकारी
चौपाई ४, दोहा ११ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
यह सपना मैं कहउँ पुकारी। होइहि सत्य गएँ दिन चारी॥ तासु बचन सुनि ते सब डरीं। जनकसुता के चरनन्हि परीं॥ ४ ॥
अर्थ
मैं पुकारकर (निश्चय के साथ) कहती हूँ कि यह स्वप्न चार दिनों बाद सत्य होकर रहेगा। उसके वचन सुनकर वे सब डर गयीं और जनकसुता के चरणों पर गिर पड़ीं।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “श्रीसीता-त्रिजटा संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता और त्रिजटा के संवाद तथा शुभ स्वप्न द्वारा आशा का संचार का वर्णन है।
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श्रीसीता-त्रिजटा संवाद