तिन्ह कर भय माता मोहि नाहीं

चौपाई ५, दोहा १७ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

तिन्ह कर भय माता मोहि नाहीं। जौं तुम्ह सुख मानहु मन माहीं॥ ५ ॥

अर्थ

[हनुमानजी ने कहा--] हे माता! यदि आप मन में सुख मानें (प्रसन्न होकर आज्ञा दें) तो मुझे उनका भय तो बिलकुल नहीं है।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “श्रीसीता-हनुमान संवाद” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी को श्रीराम की मुद्रिका और संदेश देने तथा उनके प्रभु-आगमन की आशा का संवाद का वर्णन है।

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श्रीसीता-हनुमान संवाद