सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा
सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा
चौपाई ४, दोहा १७ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा। लागि देखि सुंदर फल रूखा॥ सुनु सुत करहिं बिपिन रखवारी। परम सुभट रजनीचर भारी॥ ४ ॥
अर्थ
हे माता! सुनो, सुन्दर फलवाले वृक्षों को देखकर मुझे बड़ी ही भूख लग आयी है। [सीताजी ने कहा--] हे बेटा! सुनो, बड़े भारी योद्धा राक्षस इस वन की रखवाली करते हैं।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “श्रीसीता-हनुमान संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी को श्रीराम की मुद्रिका और संदेश देने तथा उनके प्रभु-आगमन की आशा का संवाद का वर्णन है।
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श्रीसीता-हनुमान संवाद