तरु पल्लव महुँ रहा लुकाई
तरु पल्लव महुँ रहा लुकाई
चौपाई १, दोहा ९ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
तरु पल्लव महुँ रहा लुकाई। करइ बिचार करौं का भाई॥ तेहि अवसर रावनु तहँ आवा। संग नारि बहु किएँ बनावा॥ १ ॥
अर्थ
हनुमानजी वृक्ष के पत्तों में छिप रहे और विचार करने लगे कि हे भाई! क्या करूँ (इनका दुःख कैसे दूर करूँ)? उसी समय बहुत-सी स्त्रियों को साथ लिये सज-धजकर रावण वहाँ आया।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अशोकवाटिका में हनुमान का सीता-दर्शन और रावण द्वारा साम-दाम-भय से सीताजी को विचलित करने के प्रयास का वर्णन है।
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हनुमान का सीता दर्शन, रावण का धमकाना