तब तव बदन पैठिहउँ आई
तब तव बदन पैठिहउँ आई
चौपाई ३, दोहा २ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
तब तव बदन पैठिहउँ आई। सत्य कहउँ मोहि जान दे माई॥ कवनेहुँ जतन देइ नहिं जाना। ग्रससि न मोहि कहेउ हनुमाना॥ ३ ॥
अर्थ
तब मैं आकर तुम्हारे मुँह में घुस जाऊँगा [तुम मुझे खा लेना]। हे माता! मैं सत्य कहता हूँ, अभी मुझे जाने दे। जब किसी भी उपाय से उसने जाने नहीं दिया, तब हनुमानजी ने कहा--तो फिर मुझे खा न ले।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा और छाया-ग्राहिणी राक्षसी वध का वर्णन है।
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हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा