जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा
जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा
चौपाई ४, दोहा २ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा। कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा॥ सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ। तुरत पवनसुत बत्तिस भयऊ॥ ४ ॥
अर्थ
उसने योजनभर (चार कोस में) मुँह फैलाया। तब हनुमानजी ने अपने शरीर को उससे दुगुना बढ़ा लिया। उसने सोलह योजन का मुख किया। हनुमानजी तुरंत ही बत्तीस योजन के हो गये।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा और छाया-ग्राहिणी राक्षसी वध का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा