सुनु माता साखामृग नहिं बल बुद्धि
सुनु माता साखामृग नहिं बल बुद्धि
दोहा १६ · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
सुनु माता साखामृग नहिं बल बुद्धि बिसाल। प्रभु प्रताप तें गरुड़हि खाइ परम लघु ब्याल॥ १६ ॥
अर्थ
हे माता! सुनो, वानरों में बहुत बल-बुद्धि नहीं होती। परन्तु प्रभु के प्रताप से बहुत छोटा सर्प भी गरुड़ को खा सकता है (अत्यन्त निर्बल भी महान् बलवान् को मार सकता है)।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “श्रीसीता-हनुमान संवाद” प्रकरण का दोहा १६ है। इस प्रकरण में सीताजी को श्रीराम की मुद्रिका और संदेश देने तथा उनके प्रभु-आगमन की आशा का संवाद का वर्णन है।
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श्रीसीता-हनुमान संवाद