सुनु कपि तोहि समान उपकारी

चौपाई ३, दोहा ३२ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनु कपि तोहि समान उपकारी। नहिं कोउ सुर नर मुनि तनुधारी॥ प्रति उपकार करौं का तोरा। सनमुख होइ न सकत मन मोरा॥ ३ ॥

अर्थ

[ भगवान् कहने लगे--] हे हनुमान्! सुन; तेरे समान मेरा उपकारी देवता, मनुष्य अथवा मुनि कोई भी शरीरधारी नहीं है। मैं तेरा प्रत्युपकार तो क्या करूँ, मेरा मन भी तेरे सामने नहीं हो सकता।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।

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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश